चल चल चलें, हम चले चलें
हम दूर हों इस शोर से
ना शूल हो, न रात हो
दिन हो शुरू नयी भोर से
जहां सोच हमारी ले उड़ान
क्या है भविष्य, ना हो महत्व
जहां ज़िन्दगी बस आज हो
खुशियों ही का बस हो समत्व
क्या गुम कोई, क्यों चला गया
रुका था कौन बस पल दो पल
इस सोच के पिंजर तोड़ दे
मैं आज हूँ, पर वो था कल
दम पर मेरे तू पंख खोल
लड़खड़ायेगा तो सहारा है
कल की आंधी को भूल जा
ये आज बस अब हमारा है
कोई रात से जब तू डरे
साथ जब कोई मिले नहीं
तू याद कर बस एक बार
मैं हूँ यहीं, बस यहीं कहीं
हम साथ हैं, मैं कहता था
अब ना सही तो ना सही
पर पूछ ज़रा उस सीने से
मैं था जो कल, मैं हूँ वही





2 Comments:
हम साथ हैं, मैं कहता था
अब ना सही तो ना सही
पर पूछ ज़रा उस सीने से
मैं था जो कल, मैं हूँ वही
- Wonderful lines!
Mr. Anonymous
:)
Merci :)
Thank you for the patronage.
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