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Saturday, November 19, 2011

यारियाँ





धागे सी कच्ची डोर नहीं
रेशम से पक्की यारी है
तू कहे तो जाँ भी हाज़िर है
यारी पर तेरी वारी है

कुछ क्षण भर का ये गुस्सा है
अभी पल दो पल तू रुसवा है
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा

इक रात का इतना गिला न कर
जो होना था, हो चुका चुका
इक भूल हुई, इतना तो समझ
ये सर है थोड़ा झुका झुका

कुछ खफा खफा सा कल भी था
कुछ जुदा जुदा सा अब भी है
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा

उस बोतल की सब गलती है
ये तो सब कोई बोलेंगे
गम भुला के आ, इक झप्पी पा
इक बोतल कल फिर खोलेंगे

इक रात हुई, तू रूठ गया
आखों से बादल छूट गया
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा

इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा