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Saturday, November 19, 2011

यारियाँ





धागे सी कच्ची डोर नहीं
रेशम से पक्की यारी है
तू कहे तो जाँ भी हाज़िर है
यारी पर तेरी वारी है

कुछ क्षण भर का ये गुस्सा है
अभी पल दो पल तू रुसवा है
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा

इक रात का इतना गिला न कर
जो होना था, हो चुका चुका
इक भूल हुई, इतना तो समझ
ये सर है थोड़ा झुका झुका

कुछ खफा खफा सा कल भी था
कुछ जुदा जुदा सा अब भी है
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा

उस बोतल की सब गलती है
ये तो सब कोई बोलेंगे
गम भुला के आ, इक झप्पी पा
इक बोतल कल फिर खोलेंगे

इक रात हुई, तू रूठ गया
आखों से बादल छूट गया
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा

इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा

4 Comments:

mitankar said...

pyar bhara paygham padha
yaarana ki ajeeb sangeet
abhimaan hai guroor dosti ki
roothna manana h usiki reet!


loved ur poem !

The Vice Buddha said...

Mitankar...

Pretty Lines yourself mate! :)

And Thanks...
It was just one of those nights... when everything goes wrong, and you are at ends with your besties!

I love these guys! We four rock the world together. And I am glad we got over the stupid episode and are back stronger than before. :)

teens sex said...

excelent.

The Vice Buddha said...

:)

Merci