धागे सी कच्ची डोर नहीं
रेशम से पक्की यारी है
तू कहे तो जाँ भी हाज़िर है
यारी पर तेरी वारी है
कुछ क्षण भर का ये गुस्सा है
अभी पल दो पल तू रुसवा है
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा
इक रात का इतना गिला न कर
जो होना था, हो चुका चुका
इक भूल हुई, इतना तो समझ
ये सर है थोड़ा झुका झुका
कुछ खफा खफा सा कल भी था
कुछ जुदा जुदा सा अब भी है
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा
उस बोतल की सब गलती है
ये तो सब कोई बोलेंगे
गम भुला के आ, इक झप्पी पा
इक बोतल कल फिर खोलेंगे
इक रात हुई, तू रूठ गया
आखों से बादल छूट गया
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा
इक पलक झपक तक देरी है
फिर यार मेरा बन जायेगा





4 Comments:
pyar bhara paygham padha
yaarana ki ajeeb sangeet
abhimaan hai guroor dosti ki
roothna manana h usiki reet!
loved ur poem !
Mitankar...
Pretty Lines yourself mate! :)
And Thanks...
It was just one of those nights... when everything goes wrong, and you are at ends with your besties!
I love these guys! We four rock the world together. And I am glad we got over the stupid episode and are back stronger than before. :)
excelent.
:)
Merci
Post a Comment